Suttnipaat

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Product Details

Publisher - Gautam Book Centre
Author - Dr. Bhikshu Dharmratan
Language - Hindi
Binding - Hardbound
Total Pages - 259

Description

सुत्तनिपात: बुद्धवचनमिरात मूल-पाली तथा हिंदी अनुवाद (Suttanipāta: Buddhavacnamīrāt Mūl-Pāli tathā Hindī Anuvād)

"सुत्तनिपात" (Suttanipāta) बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथों में से एक है, जिसे "थेरगाथा" और "थेरवीम्मा" के साथ जि़ंसी गाथाओं के संग्रह के रूप में जाना जाता है। इसमें भगवान बुद्ध के उपदेशों का संकलन किया गया है। यह ग्रंथ पाली भाषा में लिखा गया है, जो बौद्ध धर्म के शास्त्रों में प्रमुख भाषा है।

"सुत्तनिपात" में बुद्ध के कुछ महत्वपूर्ण उपदेशों, शिक्षाओं और प्रवचनों का संग्रह है। इन उपदेशों का उद्देश्य जीवन को सरल और सही तरीके से जीने के उपाय बताना है।

अब, इसका हिंदी अनुवाद इस प्रकार प्रस्तुत किया जा सकता है:

सुत्तनिपात का परिचय:

सुत्तनिपात पाली भाषा में एक संग्रह है जिसमें भगवान बुद्ध के उपदेशों का समावेश है। ये उपदेश सामान्य जीवन से लेकर उन्नति, शांति, और साधना के रहस्यों तक फैलते हैं। इन उपदेशों में एकाग्रता, ज्ञान, और ध्यान के माध्यम से आत्मज्ञान की प्राप्ति की दिशा में मार्गदर्शन दिया गया है। इस ग्रंथ में कई गाथाएं और सूत्र होते हैं, जिन्हें बौद्ध अनुयायी ध्यानपूर्वक पढ़ते और समझते हैं।

अनुवादित कुछ प्रमुख उद्धरण:

  1. "सत्यमेव जयते"
    "सत्य ही विजय प्राप्त करता है।"

  2. "अहिंसा परमो धर्मः"
    "हिंसा से दूर रहना ही सर्वोत्तम धर्म है।"

  3. "जीवन में सबसे महत्वपूर्ण यह नहीं कि आप कितने समय तक जीते हैं, बल्कि यह है कि आप कैसे जीते हैं।"

इन उद्धरणों में भगवान बुद्ध के शिक्षाएं इस प्रकार की हैं जो जीवन को एक उच्च उद्देश्य, शांति और संतुलन के रूप में देखने के लिए प्रेरित करती हैं।

इस ग्रंथ के माध्यम से, बुद्ध ने यह भी बताया कि जीवन में दुखों और विपत्तियों से मुक्त होने के लिए हमें अपनी मानसिक स्थिति और सोच को बदलना होगा। "सुत्तनिपात" में पाए जाने वाले उपदेश जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं, जैसे सही आचार, सही सोच, और ध्यान का महत्व।

यह ग्रंथ न केवल बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए, बल्कि समग्र मानवता के लिए एक अमूल्य धरोहर है।

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